‘कर लो दुनिया मुट्ठी में’. क्या आपको ये स्लोगन याद है? भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण प्राप्‍त और रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) को स्थापित करने वाले धीरूभाई अंबानी (Dhirubhai Ambani) ने वर्ष 2002 में इसी स्लोगन के साथ टेलीकॉम सेक्टर में एंट्री मारी थी. तब महज 600 रुपये में मोबाइल (Mobile) लॉन्च कर उन्होंने आम आदमी के हाथ में फोन थमा दिया. और अब तो लोगों के हाथ में स्‍मार्टफोन(SmartPhone) है… उसमें इंटरनेट (Internet) है और इस इंटरनेट में पूरी ​दुनिया है.

आज वाकई दुनिया हमारी मुट्ठी में है.

हमसे हजारों-लाखों किलोमीटर दूर दुनिया में क्या चल रहा है, हम अपने मोबाइल में देख सकते हैं. और यह सब संभव हुआ है, इंटरनेट के जरिये. है कि नहीं? हम और आप आज एक दिन भी इंटरनेट से दूर हो जाएं तो लगेगा जैसे काफी कुछ छूट रहा है. दिन अधूरा-अधूरा सा लगेगा. है कि नहीं?

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये इंटरनेट है क्या चीज? ये कहां पैदा होता है, कैसे बनता है? और क्या आपको मालूम है कि आखिर इसका मालिक कौन है? (What is Internet, how is it made and who is the owner of Internet?) आइए आज आपको इंटरनेट के बारे में काफी कुछ बताते हैं.

क्या है इंटरनेट, कैसे पैदा हुआ?

इंटरनेट (Internet) का शब्दिक अर्थ होता है- अंतर्जाल. लेकिन इससे इसका ​अर्थ स्पष्ट नहीं हो पाएगा. इसे आप ऐसे समझिए कि यह एक तरह का ग्लोबल नेटवर्क है, जो कई कंप्यूटर या सिस्टम्स को आपस में जोड़ता है. इसे आप कई कई कंप्यूटर्स का जाल कह सकते हैं, जो राउटर और सर्वर के माध्यम से आपस में जुड़े हुए हैं. यह विश्व का सबसे बड़ा नेटवर्क है, जिसमें सूचनाओं और डेटा के आदान-प्रदान के लिए ट्रांसफर प्रोटाेकाॅल का इस्‍तेमाल किया जाता है.

बात करें इसके पैदा होने की तो वह साल था- 1969. इस दिन कुछ कंप्यूटर्स को जोड़ कर एक नेटवर्क तैयार किया गया था. युद्ध के दौरान मैसेज भेजने के लिए इसको अमरीकी सेना विभाग ने Massachusetts Institute of Technology के साथ मिलकर Advance Research Project Agency Network नाम से डेवलप किया था.

1970 में Robert E Kahn और Vint Cerf ने Internet Protocol Suite (TCP/IP) को डेवलप किया, जो कि ARPANET में यही डेटा और फाइल ट्रांसफर के लिए यह जरूरी स्‍टैंडर्ड इंटरनेट प्रोटोकॉल बन गया. इसलिए Robert E Kahn और Vint Cerf को ही फादर ऑफ इंटरनेट कहा जाता है. बहरहाल समय के साथ इंटरनेट डेवलप होता चला गया और आज 5G टेक्नोलॉजी आ चुकी है.

इंटरनेट कहां और कैसे बनता है?

यह तो आप समझ चुके हैं कि इंटरनेट दुनियाभर के डेटा का एक जाल है. हम जो भी सूचनाएं इंटरनेट पर सर्च करते हैं, वह कहीं न कहीं स्टोर है. सर्वर के जरिये यह हम तक पहुंचता है. दुनियाभर की इन्हीं सूचनाओं के मिलने से, सर्वर के जुड़ने से इंटरनेट बनता है. सूचनाएं जहां स्टोर रहती हैं, उसे सर्वर कहा जाता है, ये 24 x 7 ऑन रहते हैं. वेब होस्टिंग कंपनियां सर्वर की सुविधा देती हैं. दुनियाभर के सर्वर फाइबर ऑप्टिक्स केबल द्वारा जुड़े होते हैं. बालों से भी पतले इन केबल्स में काफी स्पीड से डेटा ट्रांसफर की क्षमता होती है.

इंटरनेट का अधिकतम भाग समंदर (महासागरों) के अंदर फैले इन केबल्स (Optical Fiber Cable) में ही है. इनकी तुलना में सैटेलाइट का योगदान न के बराबर है. पहले केबल के जरिये ही नेट कनेक्शन दिया जाता था, हालांकि अब टेलीकॉम कंपनियां सैटेलाइट के जरिये नेट की सुविधा देने लगी हैं. यही वजह है की पहले इंटरनेट की सुविधा सिर्फ टेलीफोन लाइन के द्वारा दी जाती थी लेकिन आज टेलीकॉम कंपनियां लोगों को स्मार्टफोन में इस्तेमाल करने के लिए Satellite के जरिये नेट का इस्तेमाल करने की सुविधा देती है.

इंटरनेट का मालिक कौन है?

यह बड़ा ही दिलचस्प सवाल है. हम आप बाजार से कोई सामान लेते हैं, तो उसकी कीमत देते हैं. उस सामान का मालिक कोई न कोई कंपनी होती है. किसी सर्विस को लेकर भी यही चीज लागू होती है. लेकिन आपने कभी सोचा है कि आप अपने मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर में जो इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं, उसका मालिक (Owner of Internet) कौन है?

न न! बीएसएनएल, एयरटेल, जियो, वोडाफोन (BSNL, Jio, Airtel, Vodafone) वगैरह तो सर्विस प्रोवाइडर हैं, जिन्हें आप नेट पैक के लिए पैसे देते हैं. इंटरनेट के असली मालिक नहीं हैं ये. क्या सोच रहे हैं? इंटरनेट की मालिक सरकार भी नहीं है. दरअसल, यह किसी एक व्यक्ति, एक कंपनी, संस्था या सरकारी एजेंसी की संपत्ति नहीं है और न ही ये सीधे तौर पर इसे नियंत्रित करते हैं.

इंटरनेट पर किसी अकेली संस्था या संगठन का नियंत्रण और मालिकाना हक नहीं है, बल्कि यह सामूहिक मिल्कियत की चीज है. जी हां! इंटरनेट एक विशाल और स्वतंत्र को-ऑपरेशन यानी मिलकर काम करने वाले समूह की चीज है. कोई भी कंपनी, संस्था या सरकार अपने नेटवर्क को मेंटेन करने के लिए जिम्मेदार होती है.

कुछ एजेंसी सलाह जारी कर, इसके स्टैंडर्ड्स तय कर इसे सुचारू रखने में मदद करती हैं. W3C यानी वर्ल्ड वाइड वेब कंसोर्टियम (World Wide Web Consortium) का जिक्र कहीं आपने सुना होगा! यह इंटरनेट के विभिन्न क्षेत्रों के लिए गाइडलाइन, स्टैंडर्ड और रिसर्च करने वाला समूह है. इस तरह इंटरनेट का कोई एक मालिक नहीं है.

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